kavya-sankalan ..
कविताओं का आंशिक संकलन ..
Tuesday, July 20, 2010
ईगो ..
यह /
जानते /
और /
समझते हुए भी
/
कि
/
EGO
/
कई फसादों की जड़ है
/
लोग
/
इसे
/
कपड़े की तरह
/
अपने से चिपकाए /
चलते हैं ..
/
मैं सोच रहा था ..
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