Sunday, May 6, 2012

रोज की तरह
आज भी
सुबह होते ही
लग गया हूं
फिर से
इंसानियत खोजने ..

Thursday, March 8, 2012

मैं सोच रहा था ..

मेरी कविताएं
उनके लिये नहीं हैं
जो
देखते हैं - ख्वाब
पानी में
चलने का ..
(पृष्ठ 83 / पुस्तक - मैं सोच रहा था से )