Tuesday, December 21, 2010
प्याज ..
प्याज काटने से आंसू निकलते हैं / जनाब .. मेरे तो प्याज खरीदने में भी आंसू निकलते हैं / वे आपस में बातें कर रहे थे / मैं सुन रहा था / मैं सोच रहा था ..
Friday, December 3, 2010
कविताएं .. पुरानी .. बहुत पुरानी ..
(1)
कुत्ते को
सिखातो हो
अच्छा करते हो
कुत्ता तो कुत्ता है
शेर
कभी नहीं
हो सकता
क्या
यह भी
याद रखते हो ..
(2)
अपेक्षा किसी से
अपेक्षा एक दूसरे से
सौदा पूर्वाग्रह से
अपेक्षा न किसी से
न ही एक दूसरे से
दोस्ती पूर्वाग्रह से
(3)
कुछ देखा तो था ..
लेकिन
यह क्या
वह तो बदल गया ..
फिर से ..
अब
फिर से बदल गया ..
सभी तो नहीं
लेकिन
फिर भी
तेजी से बदल गया ..
शरीर तो नहीं
लेकिन
रंग ..
सिर्फ रंग ..
तेजी से ..
बदलता
चला गया ..
वह
गिरगिट
था ..
किसी को
देखकर
उसकी याद
आ गई ..
कुत्ते को
सिखातो हो
अच्छा करते हो
कुत्ता तो कुत्ता है
शेर
कभी नहीं
हो सकता
क्या
यह भी
याद रखते हो ..
(2)
अपेक्षा किसी से
अपेक्षा एक दूसरे से
सौदा पूर्वाग्रह से
अपेक्षा न किसी से
न ही एक दूसरे से
दोस्ती पूर्वाग्रह से
(3)
कुछ देखा तो था ..
लेकिन
यह क्या
वह तो बदल गया ..
फिर से ..
अब
फिर से बदल गया ..
सभी तो नहीं
लेकिन
फिर भी
तेजी से बदल गया ..
शरीर तो नहीं
लेकिन
रंग ..
सिर्फ रंग ..
तेजी से ..
बदलता
चला गया ..
वह
गिरगिट
था ..
किसी को
देखकर
उसकी याद
आ गई ..
Tuesday, November 30, 2010
मैं सोच रहा था ..
To have a better vision of the Future .. it is better to avoid the hang over of the past .. मैंने कहीं पढ़ा था / मैं सोच रहा था .. / कि / किसी दूसरे स्टेशन पर पहुंचने के लिये / एक स्टेशन को तो छोड़ना ही पड़ता है ..
Saturday, November 27, 2010
दर्शन की बात ..
Imperfection makes the world beautiful .. / पुलक ने कहीं / कभी कहा .. / मुझे याद रहा .. / आज भी / और / याद रहेगा मुझे हमेशा .. / इसलिये कि / इस बात में दम है / कि / यह तो / दर्शन की बात है .. / philosophy / है यह ..
मैं सोच रहा था ..
अंधेरा है / दिया तो है / और / दिये में तेल तो है / और / बाती भी है / लेकिन / वो / चिन्गारी / कहां से लाउं .. / मैं सोच रहा था ..
Friday, November 26, 2010
मैं सोच रहा था ..
कि / फटे हुए कोट से / विद्वता / बाहर झांक रही है .. / या कि / बाहर की मूखर्ता / अन्दर / झांक रही है .. / मैंने कहीं पढ़ा था .. / पढ़कर / मैं सोच रहा था ..
Saturday, July 24, 2010
अवसर / ज़िंदगी / किस्मत ..
वे अवसर खोते हैं / और / फिर / करते हैं / ज़िंदगी / से शिकवा / और / भूलते हैं / कि / हौसले की कमी थी / किस्मत की बातें तो / फ़िजूल / की हैं / कोई काम करते हुए / मैं सोच रहा था ..
Tuesday, July 20, 2010
ईगो ..
यह / जानते / और / समझते हुए भी / कि / EGO / कई फसादों की जड़ है / लोग / इसे / कपड़े की तरह / अपने से चिपकाए / चलते हैं .. / मैं सोच रहा था ..
Tuesday, May 4, 2010
मुझे अच्छी नहीं लगती यात्रा ..
चलते हुए / लोग / मिलते हैं / और / फिर / बिछुड़ जाते हैं / इसलिये / मुझे / अच्छी नहीं लगती / यात्रा .. ( पुस्तक - मैं सोच रहा था, से )
Tuesday, March 2, 2010
Sunday, February 7, 2010
वह शब्द .. अपनापन लिये हुए
और
अब
निःशब्द वक्त
वे रेखाएं .. सीधी व तिरछी
वक्त के कैनवास पर
और
अब
कोरा कैनवास वक्त का
वो रंग .. रंग-बिरंग अनुभूति
और
अब
जैसे सातो रंगो को
अपने अंदर समेटे
सफेद की उदासी ..
शायद ये सब है
बदलते वक्त
का तकाजा़ ..
क्योंकि
गर्मी फिर बरसात और फिर ठंड
और फिर से गर्मी ..
ये तो सिलसिला है ..
वक्त का ..
कि .. चुपके से .. बदलता है वक्त
आशावादी होकर
मैं सोच रहा था ..
- जेएसबी
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