दृढ़ता
किसी भी बात पर
अच्छी बात तो है
लेकिन
सभी बातों पर ..
शायद ..
शायद क्यों ..
बल्कि निश्चित रूप से
ठीक नहीं है
क्योंकि
लचीलापन तो
ज़िन्दगी की सुबह में होता है
और जीवन के संध्याकाल में
तो होता है .. क्रमशः
अकड़पन ..
प्रगति के परिप्रेक्ष्य में
मैं सोच रहा था ..
- जेएसबी
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